बसंत आया दूल्हा बन
हिंदी कविताबसंत आया दूल्हा बन बसंत आया दूल्हा बन,बासंती परिधान पहन।उर्वी उल्लासित हो रही,उस पर छाया है मदन।। पतझड़ ने खूब सताया,विरहा में थी बिन प्रीतम।पर्ण-वसन सब झड़ गये,किये क्षिति ने लाख जतन।। ऋतुराज ने उसे मनाया,नव कोपलें ,नव पल्हव।फिर से बनी नव यौवना ,मही मनमुदित है मगन।। वसुंधरा पर हर्ष छाया ,सभी मना
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