भावों की बरसात लिखती हूं

आज मैं खुशियों की एक सौगात लिखती हूं।
आज में खुशियों की एक सौगात लिखती हूं ।
मन में भरे भावों की बरसात लिखती हूं ।
आज मैं खुशियों की एक सौगात लिखती हूं ।
हरा भरा हो गया जीवन बाबुल का जब मैं अंगना में आई थी ।
कहती है मुझसे मां मेरी उस वक्त चारों ओर हरियाली छाई थी ।
किलकारियों से जो गूंजता था घर मेरा मैं वह बात लिखती हूं ।
मन में भरे भावों की बरसात लिखती हूं ।
नन्हे नन्हे कदमों से जब मैं यहां वहां पर चलती गिरती थी ।
मुख की प्रभा जैसे बिजली चमकती ,गिरूं मैं तो बादल गरजती थी।
बचपन के दिन को संजोए में एक सुंदर सा जज्बात लिखती हूं ।
मन में भरे भावों की बरसात लिखती हूं ।
सफर नया अब शुरू हुआ है तैयारी हो रही मेरी विदाई का ।
अंगना सजा है मेरी डोली से नाद हो रहा शहनाई का।
मेरी विदाई में मेरे मैया बाबुल की आंखों की बरसात लिखती हूं ।
आज खुशियों की सौगात लिखती हूं ।
आज मैं खुशियों की सौगात लिखती हूं।
रीता प्रधान
रायगढ़ छत्तीसगढ़
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